श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  7.122.31 
प्रविश्य च रणे द्रोण: पाण्डवानां वरूथिनीम्।
द्रावयामास योधान् वै शतशोऽथ सहस्रश:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य युद्धभूमि में प्रवेश कर गए और उनके सैकड़ों-हजारों सैनिकों को भगाना शुरू कर दिया।
 
Dronacharya entered the battlefield and started chasing away hundreds and thousands of their soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)