श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  7.122.30 
द्रोणोऽपि रथिनां श्रेष्ठ: पञ्चालान् पाण्डवांस्तथा।
अभ्यद्रवत संक्रुद्धो जवमास्थाय मध्यमम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
इधर, महारथी द्रोणाचार्य ने क्रोध में भरकर मध्यम गति से पांचालों और पाण्डवों पर आक्रमण किया।
 
Here Dronacharya, the best of charioteers, filled with anger, resorting to moderate speed, attacked the Panchalas and the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)