श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  7.122.3 
राजपुत्रो भवानत्र राजभ्राता महारथ:।
किमर्थं द्रवते युद्धे यौवराज्यमवाप्य हि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आप राजा के पुत्र, राजा के भाई और महाबली योद्धा हैं। युवराज का पद पाकर भी आप इस युद्धभूमि में क्यों दौड़ते फिर रहे हैं?॥3॥
 
‘You are the king's son, the king's brother and a mighty warrior. After attaining the position of crown prince, why do you keep running around in this battlefield?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)