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mahabharat 7.122.25-26h: हे मूर्ख! क्या तू भीमसेन का पराक्रम नहीं जानता, जो तूने उनसे शत्रुता की और अब युद्ध से भाग रहा है?॥25 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  7.122.25-26h 
किं भीमस्य न जानासि विक्रमं त्वं सुबालिश॥ २५॥
यत्त्वया वैरमारब्धं संयुगे प्रपलायिना।
 
 
अनुवाद
हे मूर्ख! क्या तू भीमसेन का पराक्रम नहीं जानता, जो तूने उनसे शत्रुता की और अब युद्ध से भाग रहा है?॥25 1/2॥
 
‘O fool! Do you not know the might of Bhimasena, that you took enmity against him and are now running away from the battle?॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)