श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 22-23
 
 
श्लोक  7.122.22-23 
पूर्वमुक्तश्च ते भ्राता भीष्मेणासौ सुयोधन:॥ २२॥
अजेया: पाण्डवा: संख्ये सौम्य संशाम्य तै: सह।
न च तत् कृतवान् मन्दस्तव भ्राता सुयोधन:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
‘पूर्वकाल में भीष्म ने तुम्हारे भाई दुर्योधन से कहा था कि ‘सौम्य! पाण्डव युद्ध में अजेय हैं। तुम्हें उनसे संधि कर लेनी चाहिए।’ किन्तु तुम्हारे मूर्ख भाई दुर्योधन ने ऐसा नहीं किया।
 
‘In the past Bhishma had said to your brother Duryodhan that 'Soumya! The Pandavas are invincible in war. You should enter into a treaty with them.' But your foolish brother Duryodhan did not do that.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)