श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 20-21h
 
 
श्लोक  7.122.20-21h 
यावन्न क्रुद्धॺते राजा धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:॥ २०॥
कृष्णश्च समरश्लाघी तावत् संशाम्य पाण्डवै:।
 
 
अनुवाद
‘जब तक धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर और युद्ध की प्रशंसा करने वाले भगवान श्रीकृष्ण क्रोधित न हों, तब तक तुम्हें पाण्डवों के साथ संधि कर लेनी चाहिए।
 
‘As long as King Yudhishthira, the son of Dharma, and Lord Krishna, who praises war, do not become angry, you should enter into a treaty with the Pandavas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)