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mahabharat 7.122.2: दुःशासन! ये सब रथी कहाँ भाग रहे हैं? क्या राजा दुर्योधन सुरक्षित हैं? क्या सिंधुराज जयद्रथ अभी भी जीवित है?॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.122.2 
दु:शासन रथा: सर्वे कस्माच्चैते प्रविद्रुता:।
कच्चित् क्षेमं तु नृपते: कच्चिज्जीवति सैन्धव:॥ २॥
 
 
अनुवाद
दुःशासन! ये सब रथी कहाँ भाग रहे हैं? क्या राजा दुर्योधन सुरक्षित हैं? क्या सिंधुराज जयद्रथ अभी भी जीवित है?॥ 2॥
 
‘Dushasana! Where are all these charioteers fleeing from? Is King Duryodhana safe? Is Sindhuraj Jayadratha still alive?॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)