श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  7.122.19-20h 
यावत् ते पृथिवीं पार्था हत्वा भ्रातृशतं रणे॥ १९॥
नाक्षिपन्ति महात्मानस्तावत् संशाम्य पाण्डवै:।
 
 
अनुवाद
जब तक महाहृदयी कुन्तीपुत्र तुम्हारे सौ भाइयों को युद्धभूमि में मारकर यह सम्पूर्ण पृथ्वी तुमसे छीन न ले, तब तक तुम पाण्डवों के साथ संधि कर लो॥19 1/2॥
 
Until the great-hearted son of Kunti kills a hundred of your brothers on the battlefield and takes away this entire earth from you, you should enter into a treaty with the Pandavas.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)