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mahabharat 7.122.15-16h: युद्धभूमि में अर्जुन के बाण सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी हैं। सात्यकि के बाण, जिनसे तुम भयभीत होकर भाग रहे हो, उनके समान नहीं हैं।   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  7.122.15-16h 
युधि फाल्गुनबाणानां सूर्याग्निसमवर्चसाम्॥ १५॥
न तुुल्या: सात्यकिशरा येषां भीत: पलायसे।
 
 
अनुवाद
युद्धभूमि में अर्जुन के बाण सूर्य और अग्नि के समान तेजस्वी हैं। सात्यकि के बाण, जिनसे तुम भयभीत होकर भाग रहे हो, उनके समान नहीं हैं।
 
‘In the battlefield, Arjuna's arrows are as radiant as the sun and the fire. Satyaki's arrows, from which you are running away in fear, are not like them. 15 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)