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mahabharat 7.122.13-15h: कौरवों! आज जब तुम सात्यकि के साथ अकेले युद्ध कर रहे थे, तब तुम्हारा मन युद्ध से पलायन करने को उद्यत हुआ, तब तुमने भाग जाने का निश्चय किया। फिर जब तुम युद्धभूमि में अर्जुन, भीमसेन अथवा नकुल-सहदेव को गाण्डीवधारी देखोगे, तब तुम क्या करोगे?॥ 13-14 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 13-15h
 
 
श्लोक  7.122.13-15h 
एकेन सात्वतेनाद्य युध्यमानस्य तेन वै॥ १३॥
पलायने तव मति: संग्रामाद्धि प्रवर्तते।
यदा गाण्डीवधन्वानं भीमसेनं च कौरव॥ १४॥
यमौ वा युधि द्रष्टासि तदा त्वं किं करिष्यसि।
 
 
अनुवाद
कौरवों! आज जब तुम सात्यकि के साथ अकेले युद्ध कर रहे थे, तब तुम्हारा मन युद्ध से पलायन करने को उद्यत हुआ, तब तुमने भाग जाने का निश्चय किया। फिर जब तुम युद्धभूमि में अर्जुन, भीमसेन अथवा नकुल-सहदेव को गाण्डीवधारी देखोगे, तब तुम क्या करोगे?॥ 13-14 1/2॥
 
Kauravas! When today your mind was inclined to flee from the battle while you were fighting alone with Satyaki, you decided to run away. Then when you will see Gandiva wielding Arjun, Bhimasena or Nakul-Sahadeva on the battlefield, what will you do then?॥ 13-14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)