Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.122.12-13h: परन्तु आज तो तुम युद्ध छोड़कर भयभीत होकर शत्रुओं का सुख बढ़ा रहे हो। शत्रुसूदन! तुम सेनापति हो। यदि तुम भाग जाओगे, तो युद्धभूमि में और कौन टिक सकेगा? जब रक्षक या आश्रयदाता ही भयभीत हो, तो दूसरा क्यों न भयभीत होगा?॥12 1/2॥ | mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
परन्तु आज तो तुम युद्ध छोड़कर भयभीत होकर शत्रुओं का सुख बढ़ा रहे हो। शत्रुसूदन! तुम सेनापति हो। यदि तुम भाग जाओगे, तो युद्धभूमि में और कौन टिक सकेगा? जब रक्षक या आश्रयदाता ही भयभीत हो, तो दूसरा क्यों न भयभीत होगा?॥12 1/2॥
‘But today you have left the battle and are scared and increasing the happiness of the enemies. Shatrusudan! You are the commander. If you run away, who else will be able to stay in the battlefield? When the protector or the shelterer himself is scared, then why won't the other be scared?॥ 12 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥