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mahabharat 7.122.11: हे वीर! इस भयभीत भागती हुई सेना की रक्षा के लिए तुम्हें अपने बाहुबल का सहारा लेना होगा॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 7.122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  7.122.11 
ननु नाम त्वया वीर दीर्यमाणा भयार्दिता।
स्वबाहुबलमास्थाय रक्षितव्या ह्यनीकिनी॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे वीर! इस भयभीत भागती हुई सेना की रक्षा के लिए तुम्हें अपने बाहुबल का सहारा लेना होगा॥ 11॥
 
Valiant one! You must resort to your physical strength to protect this frightened fleeing army.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)