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श्री महाभारत
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पर्व 7: द्रोण पर्व
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अध्याय 122: द्रोणाचार्यका दु:शासनको फटकारना और द्रोणाचार्यके द्वारा वीरकेतु आदि पांचालोंका वध एवं उनका धृष्टद्युम्नके साथ घोर युद्ध, द्रोणाचार्यका मूर्च्छित होना, धृष्टद्युम्नका पलायन, आचार्यकी विजय
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श्लोक 1
श्लोक
7.122.1
संजय उवाच
दु:शासनरथं दृष्ट्वा समीपे पर्यवस्थितम्।
भारद्वाजस्ततो वाक्यं दु:शासनमथाब्रवीत्॥ १॥
अनुवाद
संजय कहते हैं - हे राजन्! दु:शासन के रथ को अपने समीप खड़ा देखकर द्रोणाचार्य उससे इस प्रकार बोले-॥ 1॥
Sanjaya says - O King! Seeing Dushasan's chariot standing near him, Dronacharya spoke to him in this manner -॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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