Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.121.d3-46: जो हाथी बच गए थे, वे भी रक्त से लथपथ थे। उनके माथे फटे हुए थे। हे राजन! अनेक हाथियों के सिर कुचले हुए थे। उनके दाँत टूट गए थे, उनकी सूंडें टूट गई थीं और सात्यकि ने सैकड़ों हाथियों को क्षत-विक्षत कर दिया था। माननीय राजन! सात्यकि सर्वसिद्धि सम्पन्न की भाँति क्षण भर में पाँच सौ योद्धाओं को मारकर सेना के मध्य विचरण करने लगे। उस समय घायल हाथी युयुधान का रथ छोड़कर भाग गए। | mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो हाथी बच गए थे, वे भी रक्त से लथपथ थे। उनके माथे फटे हुए थे। हे राजन! अनेक हाथियों के सिर कुचले हुए थे। उनके दाँत टूट गए थे, उनकी सूंडें टूट गई थीं और सात्यकि ने सैकड़ों हाथियों को क्षत-विक्षत कर दिया था। माननीय राजन! सात्यकि सर्वसिद्धि सम्पन्न की भाँति क्षण भर में पाँच सौ योद्धाओं को मारकर सेना के मध्य विचरण करने लगे। उस समय घायल हाथी युयुधान का रथ छोड़कर भाग गए।
The elephants who had survived were also soaked in blood. Their foreheads were torn. O King! The heads of many elephants were bruised. Their teeth were broken, their proboscises were broken and Satyaki had mutilated hundreds of elephants. Honorable King! Satyaki, like a master of all abilities, killed five hundred warriors in a moment and started roaming in the middle of the army. At that time, the injured elephants left Yuyudhan's chariot and ran away.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥