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mahabharat 7.121.6: मैं अपने अभागे पुत्र के लिए सब कुछ बुरा मान रहा हूँ, क्योंकि सात्यकि ने अकेले ही युद्धभूमि में अनेक शक्तिशाली योद्धाओं को मार गिराया है।   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.121.6 
विपरीतमहं मन्ये मन्दभाग्यं सुतं प्रति।
यत्रावध्यन्त समरे सात्वतेन महारथा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैं अपने अभागे पुत्र के लिए सब कुछ बुरा मान रहा हूँ, क्योंकि सात्यकि ने अकेले ही युद्धभूमि में अनेक शक्तिशाली योद्धाओं को मार गिराया है।
 
I am assuming all things to be bad for my unfortunate son, because Satyaki alone has killed many mighty warriors in the battlefield.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)