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mahabharat 7.121.58: वे सभी सारथी, जिनके साथ दु:शासन पहले लौटा था, भयभीत होकर द्रोणाचार्य के रथ की ओर दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  7.121.58 
यैस्तु दु:शासन: सार्धं रथै: पूर्वं न्यवर्तत।
ते भीतास्त्वभ्यधावन्त सर्वे द्रोणरथं प्रति॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
वे सभी सारथी, जिनके साथ दु:शासन पहले लौटा था, भयभीत होकर द्रोणाचार्य के रथ की ओर दौड़े।
 
All the charioteers with whom Dushasan had returned earlier, became frightened and ran towards Dronacharya's chariot. 58
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि जयद्रथवधपर्वणि सात्यकिप्रवेशे एकविंशत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १२१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत जयद्रथवधपर्वमें सात्यकिप्रवेशविषयक एक सौ इक्कीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२१॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ५ श्लोक मिलाकर कुल ६३ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)