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श्लोक  7.121.56 
तथैवं वदतस्तस्य भारद्वाजस्य सारथे:।
प्रत्यदृश्यत शैनेयो निघ्नन् बहुविधान् रथान्॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
जब द्रोणाचार्य का सारथि यह कह रहा था, उसी समय शिनिन का पुत्र सात्यकि अनेक सारथिओं को मारता हुआ दिखाई दिया।
 
While Dronacharya's charioteer was saying this, at that very time Satyaki, the son of Shinin, was seen killing many charioteers. 56.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)