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mahabharat 7.121.55: हे शत्रुओं का नाश करनेवाले! इस समय जो कर्तव्य तुम्हें सौंपा गया है, उस पर ध्यान दो; यहीं रहो या अन्यत्र जाओ। सात्यकि बहुत दूर चले गए हैं।॥55॥   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  7.121.55 
अत्र कार्यं समाधत्स्व प्राप्तकालमरिंदम।
स्थाने वा गमने वापि दूरं यातश्च सात्यकि:॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करनेवाले! इस समय जो कर्तव्य तुम्हें सौंपा गया है, उस पर ध्यान दो; यहीं रहो या अन्यत्र जाओ। सात्यकि बहुत दूर चले गए हैं।॥55॥
 
O destroyer of enemies! Pay attention to the duty that is assigned to you at this time; whether to stay here or go elsewhere. Satyaki has gone far away.'॥ 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)