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mahabharat 7.121.48-49: उस भीषण ध्वनि को सुनकर द्रोणाचार्य ने अपने सारथि से कहा, 'सूत! सात्वतवंशी यह महाबली योद्धा सात्यकि युद्धभूमि में मृत्यु के समान घूम रहा है और कौरव सेना को बार-बार विदीर्ण कर रहा है। सारथि! मेरे रथ को उस स्थान पर ले चलो, जहाँ से यह भीषण ध्वनि आ रही है।'   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 48-49
 
 
श्लोक  7.121.48-49 
तं शब्दं तुमुलं श्रुत्वा द्रोणो यन्तारमब्रवीत्।
एष सूत रणे क्रुद्ध: सात्वतानां महारथ:॥ ४८॥
दारयन् बहुधा सैन्यं रणे चरति कालवत्।
यत्रैष शब्दस्तुमुलस्तत्र सूत रथं नय॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
उस भीषण ध्वनि को सुनकर द्रोणाचार्य ने अपने सारथि से कहा, 'सूत! सात्वतवंशी यह महाबली योद्धा सात्यकि युद्धभूमि में मृत्यु के समान घूम रहा है और कौरव सेना को बार-बार विदीर्ण कर रहा है। सारथि! मेरे रथ को उस स्थान पर ले चलो, जहाँ से यह भीषण ध्वनि आ रही है।'
 
On hearing that horrific sound, Dronacharya said to his charioteer, 'Suta! This mighty warrior Satyaki of the Satvat clan is roaming around in the battlefield like death, furiously ripping apart the Kaurava army again and again. Charioteer! Take my chariot to the place where this horrific sound is coming from.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)