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mahabharat 7.121.45: मनुष्य, हाथी और घोड़े चूर्णित पत्थरों से ढके हुए वहाँ टिक नहीं सकते थे, मानो उन्हें मधुमक्खियों ने डंक मार दिया हो ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  7.121.45 
अश्मचूर्णैरवाकीर्णा मनुष्यगजवाजिन:।
नाशक्नुवन्नवस्थातुं भ्रमरैरिव दंशिता:॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य, हाथी और घोड़े चूर्णित पत्थरों से ढके हुए वहाँ टिक नहीं सकते थे, मानो उन्हें मधुमक्खियों ने डंक मार दिया हो ॥45॥
 
Men, elephants and horses, covered with the powdered stones, could not stay there, as if they had been stung by bees. ॥ 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)