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mahabharat 7.121.44: आकाश में तीखे बाणों से चट्टानों के टुकड़े-टुकड़े होने की ध्वनि से भयभीत होकर रथ, घोड़े, हाथी और पैदल सैनिक युद्धभूमि में इधर-उधर भागने लगे ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  7.121.44 
अद्रीणां भिद्यमानानामन्तरिक्षे शितै: शरै:।
शब्देन प्राद्रवन् संख्ये रथाश्वगजपत्तय:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
आकाश में तीखे बाणों से चट्टानों के टुकड़े-टुकड़े होने की ध्वनि से भयभीत होकर रथ, घोड़े, हाथी और पैदल सैनिक युद्धभूमि में इधर-उधर भागने लगे ॥ 44॥
 
Frightened by the sound of rocks breaking into pieces by sharp arrows in the sky, chariots, horses, elephants and infantry began fleeing here and there on the battlefield. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)