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mahabharat 7.121.37: पर्वतीय सेना द्वारा की गई उस भयंकर पत्थर-वर्षा को समस्त शक्तियों के राजा महाबली सात्यकि ने अपने सर्प-सदृश बाणों द्वारा टुकड़े-टुकड़े कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  7.121.37 
तामश्मवृष्टिं तुमुलां पर्वतीयै: समीरिताम्।
चिच्छेदोरगसंकाशैर्नाराचै: शिनिपुङ्गव:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पर्वतीय सेना द्वारा की गई उस भयंकर पत्थर-वर्षा को समस्त शक्तियों के राजा महाबली सात्यकि ने अपने सर्प-सदृश बाणों द्वारा टुकड़े-टुकड़े कर दिया।
 
That terrible shower of stones brought about by the mountain troops was shattered to pieces by the great Satyaki, the king of all powers, with his serpent-like arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)