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mahabharat 7.121.29: जब वे हाथी मृत्यु के मुख में जा रहे थे, तब दु:शासन ने लूटने वाले म्लेच्छों से कहा, 'धर्म को न जानने वाले योद्धाओं! इस प्रकार भागकर तुम्हें क्या लाभ होगा? लौटकर युद्ध करो।'॥29॥   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.121.29 
तेषु प्रकाल्यमानेषु दस्यून् दु:शासनोऽब्रवीत्।
निवर्तध्वमधर्मज्ञा युध्यध्वं किं सृतेन व:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जब वे हाथी मृत्यु के मुख में जा रहे थे, तब दु:शासन ने लूटने वाले म्लेच्छों से कहा, 'धर्म को न जानने वाले योद्धाओं! इस प्रकार भागकर तुम्हें क्या लाभ होगा? लौटकर युद्ध करो।'॥29॥
 
When those elephants were going to the jaws of death, Dushasan said to the plundering mlecchas, 'You warriors who do not know Dharma! What will you gain by running away like this? Come back and fight.'॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)