श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  7.121.2 
कथं वैषां तदा युद्धे धृतिरासीन्मुमूर्षताम्।
शैनेयचरितं दृष्ट्वा यादृशं सव्यसाचिन:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वे सब लोग मरना चाहते थे। उस समय युद्धस्थल में अर्जुन के समान सात्यकि का चरित्र देखकर उनकी क्या राय थी?॥2॥
 
All of them wanted to die. What was their opinion at that time after seeing Satyaki's character, which was similar to Arjuna's, on the battlefield?॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)