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mahabharat 7.121.1: धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! मेरे उन निर्लज्ज पुत्रों ने जब सात्यकि और अर्जुन को मेरी विशाल सेना को रौंदते देखा, तो उन्होंने क्या किया?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 7.121: सात्यकिके द्वारा पाषाणयोधी म्लेच्छोंकी सेनाका संहार और दु:शासनका सेनासहित पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.121.1 
धृतराष्ट्र उवाच
सम्प्रमृद्य महत् सैन्यं यान्तं शैनेयमर्जुनम्।
निर्ह्रीका मम ते पुत्रा: किमकुर्वत संजय॥ १॥
 
 
अनुवाद
धृतराष्ट्र ने पूछा - संजय! मेरे उन निर्लज्ज पुत्रों ने जब सात्यकि और अर्जुन को मेरी विशाल सेना को रौंदते देखा, तो उन्होंने क्या किया?॥1॥
 
Dhritarashtra asked - Sanjay! What did those shameless sons of mine do when they saw Satyaki and Arjuna trampling my huge army?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)