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mahabharat 7.120.45-46h: भरत! आपकी सेना को भागते देख सात्यकि ने तीक्ष्ण बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, जो सुवर्ण पंख वाले थे और जिन्हें उन्होंने सान पर तीखा किया था।   |   mahabharat अध्याय 7.120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 45-46h
 
 
श्लोक  7.120.45-46h 
विद्रुतं तत्र तत् सैन्यं दृष्ट्वा भारत सात्यकि:॥ ४५॥
अवाकिरच्छरैस्तीक्ष्णै रुक्मपुङ्खै: शिलाशितै:।
 
 
अनुवाद
भरत! आपकी सेना को भागते देख सात्यकि ने तीक्ष्ण बाणों की वर्षा आरम्भ कर दी, जो सुवर्ण पंख वाले थे और जिन्हें उन्होंने सान पर तीखा किया था।
 
Bharata! Seeing your army fleeing, Satyaki began to shower sharp arrows with golden feathers, which he had sharpened on the whetstone. 45 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)