श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 38-39
 
 
श्लोक  7.120.38-39 
अथान्यद् धनुरादाय श्यालस्तव विशाम्पते॥ ३८॥
अष्टाभि: सात्यकिं विद्‍ध्वा पुनर्विव्याध पञ्चभि:।
दु:शासनश्च दशभिर्दु:सहश्च त्रिभि: शरै:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! तत्पश्चात् आपके साले ने दूसरा धनुष लेकर पहले सात्यकि पर आठ बाण चलाए। फिर पाँच बाणों से उसे घायल कर दिया। दु:शासन ने दस बाण चलाए और दु:शासन ने भी तीन बाण चलाए।
 
Prajanath! Thereafter your brother-in-law took another bow and first shot eight arrows at Satyaki. Then he injured him with five arrows. Dushasan shot ten arrows and Dushasan also shot three arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)