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mahabharat 7.120.28-29h: आपकी सारी सेना वहाँ शीत से पीड़ित गौओं के समान घूम रही थी। मैंने एक भी ऐसा पैदल, सारथी, हाथी, घोड़ा तथा सवार नहीं देखा जो युयुधान के बाणों से बिंध न गया हो।   |   mahabharat अध्याय 7.120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  7.120.28-29h 
बभ्राम तत्र तत्रैव गाव: शीतार्दिता इव।
पदातिनं रथं नागं सादिनं तुरगं तथा॥ २८॥
अविद्धं तत्र नाद्राक्षं युयुधानस्य सायकै:।
 
 
अनुवाद
आपकी सारी सेना वहाँ शीत से पीड़ित गौओं के समान घूम रही थी। मैंने एक भी ऐसा पैदल, सारथी, हाथी, घोड़ा तथा सवार नहीं देखा जो युयुधान के बाणों से बिंध न गया हो।
 
Your entire army was roaming around there like cows suffering from cold. I did not see a single infantryman, charioteer, elephant and horse with rider that was not pierced by Yuyudhan's arrows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)