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श्लोक  7.120.25 
आश्चर्यं तत्र राजेन्द्र सुमहद् दृष्टवानहम्।
न मोघ: सायक: कश्चित् सात्यकेरभवत् प्रभो॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे पराक्रमी राजा! मैंने वहाँ सबसे बड़ा आश्चर्य यह देखा कि सात्यकि का एक भी बाण व्यर्थ नहीं गया।
 
O powerful king! The greatest wonder I saw there was that not a single arrow of Satyaki went to waste. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)