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mahabharat 7.120.24: महाराज! उस युद्धस्थल में वीर सात्यकि बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गये, फिर भी उन्होंने अपने मन में किंचितमात्र भी भय नहीं आने दिया और आपके बहुत से सैनिकों को मार डाला।   |   mahabharat अध्याय 7.120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.120.24 
प्रच्छाद्यमान: समरे शरजालै: स वीर्यवान्।
असम्भ्रमन् महाराज तावकानवधीद् बहून्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस युद्धस्थल में वीर सात्यकि बाणों की वर्षा से आच्छादित हो गये, फिर भी उन्होंने अपने मन में किंचितमात्र भी भय नहीं आने दिया और आपके बहुत से सैनिकों को मार डाला।
 
Maharaj! In that battle ground the valiant Satyaki was covered with a hail of arrows, yet he did not let the slightest fear enter his mind and killed many of your soldiers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)