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mahabharat 7.120.2: सिंह-पुरुष सात्यकि के दाँत बड़े सुन्दर थे। उनका कवच और ध्वज भी अद्वितीय था। वे हिरण को सूँघकर बाघ की तरह तुम्हारी सेना को भयभीत कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 7.120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.120.2 
चारुदंष्ट्रो नरव्याघ्रो विचित्रकवचध्वज:।
मृगं व्याघ्र इवाजिघ्रंस्तव सैन्यमभीषयत्॥ २॥
 
 
अनुवाद
सिंह-पुरुष सात्यकि के दाँत बड़े सुन्दर थे। उनका कवच और ध्वज भी अद्वितीय था। वे हिरण को सूँघकर बाघ की तरह तुम्हारी सेना को भयभीत कर रहे थे।
 
The teeth of the lion-man Satyaki were very beautiful. His armour and flag were also unique. He was frightening your army like a tiger, smelling the deer.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)