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mahabharat 7.120.12-13h: माननीय राजा! पूर्णिमा के दिन जैसे वायु के झोंकों से समुद्र तेजी से ऊपर उठता है, वैसे ही आपकी सेना बड़े जोर से गर्जना और गर्जना करने लगी।   |   mahabharat अध्याय 7.120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 120: सात्यकिद्वारा दुर्योधनकी सेनाका संहार तथा भाइयोंसहित दुर्योधनका पलायन  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  7.120.12-13h 
अथ शब्दो महानासीत् तव सैन्यस्य मारिष॥ १२॥
मारुतोद्‍धूतवेगस्य सागरस्येव पर्वणि।
 
 
अनुवाद
माननीय राजा! पूर्णिमा के दिन जैसे वायु के झोंकों से समुद्र तेजी से ऊपर उठता है, वैसे ही आपकी सेना बड़े जोर से गर्जना और गर्जना करने लगी।
 
Honorable King! On a full moon day, like the ocean rising rapidly due to the gusts of wind, your army started roaring and roaring very loudly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)