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mahabharat 7.12.d3h-31: हे शत्रुओं का नाश करने वाले आर्य धृतराष्ट्र! तत्पश्चात् दुर्योधन ने द्रोणाचार्य से युधिष्ठिर को पकड़ लेने की प्रतिज्ञा की घोषणा समस्त युद्ध शिविरों में तथा प्रायः उन सभी स्थानों पर करवा दी जहाँ सेना विश्राम करती थी॥31॥   |   mahabharat अध्याय 7.12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक d3h-31
 
 
श्लोक  7.12.d3h-31 
ततो दुर्योधनेनापि ग्रहणं पाण्डवस्य तत्।
(स्कन्धावारेषु सर्वेषु यथास्थानेषु मारिष।)
सैन्यस्थानेषु सर्वेषु सुघोषितमरिंदम॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
हे शत्रुओं का नाश करने वाले आर्य धृतराष्ट्र! तत्पश्चात् दुर्योधन ने द्रोणाचार्य से युधिष्ठिर को पकड़ लेने की प्रतिज्ञा की घोषणा समस्त युद्ध शिविरों में तथा प्रायः उन सभी स्थानों पर करवा दी जहाँ सेना विश्राम करती थी॥31॥
 
O Arya Dhritarashtra, the destroyer of enemies! Thereafter Duryodhana got the vow of Dronacharya to capture Yudhishthira announced in all the battle camps and almost all the places where the army rested. ॥ 31॥
 
इति श्रीमहाभारते द्रोणपर्वणि द्रोणाभिषेकपर्वणि द्रोणप्रतिज्ञायां द्वादशोऽध्याय:॥ १२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत द्रोणपर्वके अन्तर्गत द्रोणाभिषेकपर्वमें द्रोणप्रतिज्ञाविषयक बारहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ३३ १/२ श्लोक हैं।)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)