श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक d1-16
 
 
श्लोक  7.12.d1-16 
न च शक्या रणे सर्वे निहन्तुममरैरपि।
(यदि सर्वे हनिष्यन्ते पाण्डवा: ससुता मृधे।
तत: कृत्स्नं वशे कृत्वा नि:शेषं नृपमण्डलम्॥
ससागरवनां स्फीतां विजित्य वसुधामिमाम्।
विष्णुर्दास्यति कृष्णायै कुन्त्यै वा पुरुषोत्तम:॥)
य एव तेषां शेष: स्यात् स एवास्मान् न शेषयेत्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
रणभूमि में समस्त पाण्डवों को समस्त देवता भी नहीं मार सकते। यदि युद्ध में समस्त पाण्डव अपने पुत्रों सहित मारे भी जाएँ, तो भी परम मंगलमय भगवान श्रीकृष्ण सम्पूर्ण राज्य को अपने अधीन कर लेंगे और समुद्रों तथा वनों सहित इस समस्त समृद्ध वसुधा को जीतकर द्रौपदी या कुन्ती को दे देंगे। अथवा पाण्डवों में जो भी बचेगा, वह हमें जीवित नहीं रहने देगा। 16॥
 
Even all the gods cannot kill all the Pandavas in the battlefield. Even if all the Pandavas along with their sons are killed in the war, the most auspicious Lord Shri Krishna will bring the entire kingdom under his control and will conquer all this prosperous Vasudha along with the oceans and forests and give it to Draupadi or Kunti. Or whoever is left among the Pandavas will not let us survive. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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