Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 7.12.8: राजन्! कुंतीपुत्र युधिष्ठिर धन्य हैं, जिन्हें आप जीवित ही पकड़ना चाहते हैं। आज आप मुझसे उस महाबली योद्धा को मारने का अनुरोध नहीं कर रहे हैं।'   |   mahabharat अध्याय 7.12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  7.12.8 
धन्य: कुन्तीसुतो राजन् यस्य ग्रहणमिच्छसि।
न वधार्थं सुदुर्धर्षं वरमद्य प्रयाचसे॥ ८॥
 
 
अनुवाद
राजन्! कुंतीपुत्र युधिष्ठिर धन्य हैं, जिन्हें आप जीवित ही पकड़ना चाहते हैं। आज आप मुझसे उस महाबली योद्धा को मारने का अनुरोध नहीं कर रहे हैं।'
 
‘King! Blessed is Yudhishthira, the son of Kunti, whom you want to capture alive. Today you are not requesting me to kill that fierce warrior.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)