श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  7.12.5 
ततो दुर्योधनो राजा कर्णदु:शासनादिभि:।
सम्मन्त्र्योवाच दुर्धर्षमाचार्यं जयतां वरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब राजा दुर्योधन ने कर्ण, दु:शासन आदि से परामर्श करके विजयी योद्धाओं में श्रेष्ठ एवं अजेय आचार्य द्रोण से इस प्रकार कहा- 5॥
 
Then King Duryodhana, after consulting with Karna, Dushasan etc., said to Drona, the best and invincible Acharya Drona among the victorious warriors, in this manner – 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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