श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 3-4
 
 
श्लोक  7.12.3-4 
यत् कौरवाणामृषभादापगेयादनन्तरम्।
सैनापत्येन यद् राजन् मामद्य कृतवानसि॥ ३॥
सदृशं कर्मणस्तस्य फलं प्राप्नुहि भारत।
करोमि कामं कं तेऽद्य प्रवृणीष्व यमिच्छसि॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! महान कौरवों के पश्चात् गंगापुत्र आपने आज मुझे सेनापति बनाया है। हे भरतनन्दन! इस कर्म के अनुसार मुझसे कुछ पुरस्कार प्राप्त कीजिए। आज मैं आपकी कौन-सी इच्छा पूरी करूँ? जो इच्छा हो, वही माँग लीजिए।॥3-4॥
 
‘O King! After the great Kauravastha, son of Ganga, you have made me the commander of the army today. O Bharatanandan! Receive some reward from me in accordance with this deed. Which of your wishes should I fulfill today? Ask for whatever you desire.’॥ 3-4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)