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mahabharat 7.12.25: हे पुरुषश्रेष्ठ! तुम्हारी विजय उन्हें पकड़ने में है, उन्हें मारने में नहीं; किन्तु इसी उपाय से तुम उन्हें पकड़ सकोगे।   |   mahabharat अध्याय 7.12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  7.12.25 
ग्रहणे हि जयस्तस्य न वधे पुरुषर्षभ।
एतेन चाप्युपायेन ग्रहणं समुपैष्यसि॥ २५॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषश्रेष्ठ! तुम्हारी विजय उन्हें पकड़ने में है, उन्हें मारने में नहीं; किन्तु इसी उपाय से तुम उन्हें पकड़ सकोगे।
 
O best of men! Your victory lies in catching them, not in killing them; but only by this means will you be able to catch them. 25.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)