Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.12.22-23: इसमें कोई संदेह नहीं कि अर्जुन मेरा शिष्य है और उसने मुझसे ही शस्त्र विद्या सीखी है। हालाँकि, वह युवा है। वह अनेक प्रकार के पुण्य कर्मों से संपन्न है। उसने विजय या मृत्यु में से किसी एक को चुनने का दृढ़ निश्चय कर लिया है। उसने इंद्र और रुद्र जैसे देवताओं से भी अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र सीखे हैं और आपके प्रति उसका क्रोध बढ़ गया है। इसलिए हे राजन, मुझे अर्जुन से युद्ध करने का उत्साह नहीं है। | mahabharat अध्याय 7.12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
असंशयं स मे शिष्यो मत्पूर्वश्चास्त्रकर्मणि।
तरुण: सुकृतैर्युक्त एकायनगतश्च ह॥ २२॥
अस्त्राणीन्द्राच्च रुद्राच्च भूय: स समवाप्तवान्।
अमर्षितश्च ते राजंस्ततो नामर्षयाम्यहम्॥ २३॥
अनुवाद
इसमें कोई संदेह नहीं कि अर्जुन मेरा शिष्य है और उसने मुझसे ही शस्त्र विद्या सीखी है। हालाँकि, वह युवा है। वह अनेक प्रकार के पुण्य कर्मों से संपन्न है। उसने विजय या मृत्यु में से किसी एक को चुनने का दृढ़ निश्चय कर लिया है। उसने इंद्र और रुद्र जैसे देवताओं से भी अनेक दिव्य अस्त्र-शस्त्र सीखे हैं और आपके प्रति उसका क्रोध बढ़ गया है। इसलिए हे राजन, मुझे अर्जुन से युद्ध करने का उत्साह नहीं है।
There is no doubt that Arjuna is my disciple and he has learnt the art of weapons from me first. However, he is young. He is endowed with many types of pious deeds. He has firmly decided to choose either victory or death. He has again learnt many divine weapons from gods like Indra and Rudra and his resentment towards you has increased. Therefore, O King, I do not have the enthusiasm to fight with Arjuna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥