श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  7.12.20 
द्रोण उवाच
न चेद् युधिष्ठिरं वीर: पालयत्यर्जुनो युधि।
मन्यस्व पाण्डवश्रेष्ठमानीतं वशमात्मन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
द्रोणाचार्य बोले- राजन्! यदि वीर अर्जुन युद्ध में युधिष्ठिर की रक्षा न करें, तो आपको समझना चाहिए कि पाण्डवों में श्रेष्ठ युधिष्ठिर आपके वश में आ गए हैं॥20॥
 
Dronacharya said – King! If the brave Arjuna does not protect Yudhishthira in the battle, then you should consider that Yudhishthira, the best of the Pandavas, has come under your control. 20॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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