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mahabharat 7.12.18: इस प्रकार मेरी विजय अवश्य ही चिरकाल तक बनी रहेगी। इसलिए मैं धर्मराज युधिष्ठिर को कभी नहीं मारना चाहता।'॥18॥   |   mahabharat अध्याय 7.12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  7.12.18 
सोऽयं मम जयो व्यक्तं दीर्घकालं भविष्यति।
अतो न वधमिच्छामि धर्मराजस्य कर्हिचित्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार मेरी विजय अवश्य ही चिरकाल तक बनी रहेगी। इसलिए मैं धर्मराज युधिष्ठिर को कभी नहीं मारना चाहता।'॥18॥
 
This way my victory will certainly remain for a long time. That is why I never want to kill Dharmaraja Yudhishthira.'॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)