श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  7.12.17 
सत्यप्रतिज्ञे त्वानीते पुनर्द्यूतेन निर्जिते।
पुनर्यास्यन्त्यरण्याय पाण्डवास्तमनुव्रता:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
‘यदि अपने वचन के पक्के राजा युधिष्ठिर जीवित ही पकड़ लिए जाएँ और पुनः जुए में हार जाएँ, तो उनके प्रति समर्पित पाण्डव पुनः वन में चले जाएँगे॥17॥
 
‘If King Yudhishthira, who is true to his word, is captured alive and is again defeated in gambling, then the Pandavas, who are devoted to him, will again go to the forest.॥ 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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