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mahabharat 7.12.15: आचार्य! यदि कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर मारे गए तो मैं युद्धभूमि में विजयी नहीं हो सकता, क्योंकि यदि युधिष्ठिर मारे गए तो कुन्तीपुत्र हम सबका अवश्य वध कर देंगे॥ 15॥   |   mahabharat अध्याय 7.12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  7.12.15 
वधे कुन्तिसुतस्याजौ नाचार्य विजयो मम।
हते युधिष्ठिरे पार्था हन्यु: सर्वान् हि नो ध्रुवम्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
आचार्य! यदि कुन्तीपुत्र युधिष्ठिर मारे गए तो मैं युद्धभूमि में विजयी नहीं हो सकता, क्योंकि यदि युधिष्ठिर मारे गए तो कुन्तीपुत्र हम सबका अवश्य वध कर देंगे॥ 15॥
 
Acharya! I cannot be victorious on the battlefield if Yudhishthira, son of Kunti, is killed because if Yudhishthira is killed, Kunti's sons will surely kill all of us.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)