श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 12: दुर्योधनका वर माँगना और द्रोणाचार्यका युधिष्ठिरको अर्जुनकी अनुपस्थितिमें जीवित पकड़ लानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  7.12.10 
आहोस्विद् धर्मराजस्य द्वेष्टा तस्य न विद्यते।
यदीच्छसि त्वं जीवन्तं कुलं रक्षसि चात्मन:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
अथवा क्या इसका कारण यह नहीं है कि इस संसार में धर्मराज युधिष्ठिर से द्वेष रखने वाला कोई नहीं है? इसीलिए तुम उन्हें जीवित देखना चाहते हो और अपने कुल की रक्षा करना चाहते हो॥10॥
 
‘Or is it not because there is no one in this world who hates Dharmaraja Yudhishthira? That is why you want to see him alive and protect your clan.॥ 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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