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mahabharat 7.119.7-8h: योद्धाओं में श्रेष्ठ कृतवर्मा को परास्त करके मुझे ऐसा लग रहा है मानो मैंने अर्जुन को पा लिया हो। जैसे सूखी घास और लताओं से युक्त वन में जलती हुई अग्नि को कोई बाधा नहीं होती, वैसे ही इन असंख्य सेनाओं को देखकर मुझे तनिक भी भय नहीं लग रहा।   |   mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  7.119.7-8h 
हार्दिक्यं योधवर्यं च मन्ये प्राप्तं धनंजयम्।
न हि मे जायते त्रासो दृष्ट्वा सैन्यान्यनेकश:॥ ७॥
वह्नेरिव प्रदीप्तस्य वने शुष्कतृणोलपे।
 
 
अनुवाद
योद्धाओं में श्रेष्ठ कृतवर्मा को परास्त करके मुझे ऐसा लग रहा है मानो मैंने अर्जुन को पा लिया हो। जैसे सूखी घास और लताओं से युक्त वन में जलती हुई अग्नि को कोई बाधा नहीं होती, वैसे ही इन असंख्य सेनाओं को देखकर मुझे तनिक भी भय नहीं लग रहा।
 
After defeating Kritavarma, the best among warriors, I feel as if I have found Arjuna. Just as there is no obstacle for a fire burning in a forest with dry grass and creepers, similarly I am not scared at all on seeing these numerous armies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)