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श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय  »  श्लोक 50-52h
 
 
श्लोक  7.119.50-52h 
अल्पावशिष्टा: सम्भग्ना: कृच्छ्रप्राणा विचेतस:॥ ५०॥
जिता: संख्ये महाराज युयुधानेन दंशिता:।
पार्ष्णिभिश्च कशाभिश्च ताडयन्तस्तुरङ्गमान्॥ ५१॥
जवमुत्तममास्थाय सर्वत: प्राद्रवन् भयात्।
 
 
अनुवाद
महाराज! कुछ यवन बचे थे, जिन्होंने बड़ी कठिनाई से अपने प्राण बचाए थे। वे अपने समुदाय से अलग होकर अचेत हो रहे थे। कवचधारी वे सभी यवन युद्धभूमि में युयुधान से पराजित हो गए। वे अपने घोड़ों को हाथों और चाबुकों से पीटते हुए, तीव्र वेग का लाभ उठाकर, भयभीत होकर चारों दिशाओं में भाग गए।
 
Maharaj! There were a few Yavanas left who had saved their lives with great difficulty. They were becoming unconscious after being separated from their community. All those Yavanas wearing armor were defeated by Yuyudhan in the battlefield. They fled in fear in all directions taking advantage of great speed, beating their horses with hands and whips. 50-51 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)