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mahabharat 7.119.32: आज जब मैं अपने हाथों को तेजी से चलाकर उत्तम बाण चलाऊंगा, तब कौरवों को मेरा धनुष घूमता हुआ लम्बवत् दिखाई देगा।   |   mahabharat अध्याय 7.119: सात्यकि और उनके सारथिका संवाद तथा सात्यकिद्वारा काम्बोजों और यवन आदिकी सेनाकी पराजय   ।   mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  7.119.32 
अद्य मे क्षिप्रहस्तस्य क्षिपत: सायकोत्तमान्।
अलातचक्रप्रतिमं धनुर्द्रक्ष्यन्ति कौरवा:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
आज जब मैं अपने हाथों को तेजी से चलाकर उत्तम बाण चलाऊंगा, तब कौरवों को मेरा धनुष घूमता हुआ लम्बवत् दिखाई देगा।
 
Today, when I move my hands swiftly and shoot excellent arrows, the Kauravas will see my bow like a spinning top wheel. 32.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)