श्री महाभारत  »  पर्व 7: द्रोण पर्व  »  अध्याय 118: सात्यकिद्वारा सुदर्शनका वध  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  7.118.13 
तथा तु तेनाभिहतस्तरस्वी
नप्ता शिनेरिन्द्रसमानवीर्य:।
सुदर्शनस्येषुगणै: सुतीक्ष्णै-
र्हयान् निहत्याशु ननाद नादम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
सुदर्शन द्वारा इस प्रकार घायल होकर इन्द्र के समान बलवान और वेगवान शिनि के पौत्र सत्य ने अपने तीखे बाणों द्वारा शीघ्रतापूर्वक सुदर्शन के घोड़ों को मार डाला और बड़े जोर से सिंहनाद किया॥13॥
 
Being thus injured by Sudarshan, Satya, the grandson of Shini, who was as strong and swift as Indra, quickly killed Sudarshan's horses with his well-sharpened arrows and gave a loud lion cry. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)