Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 7.118.11: फिर उसने अग्नि के समान तेजस्वी और सुन्दर पंखों वाले तीन तीखे बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया, जो उसके कानों तक खींचे गए थे। वे बाण सात्यकि के कवच को छेदकर उसके शरीर में घुस गए॥11॥ | mahabharat अध्याय 7.118: सात्यकिद्वारा सुदर्शनका वध । mahabharat पर्व 7: द्रोण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुन: स बाणैस्त्रिभिरग्निकल्पै-
राकर्णपूर्णैर्निशितै: सुपुङ्खै:।
विव्याध देहावरणं विभिद्य
ते सात्यकेराविविशु: शरीरम्॥ ११॥
अनुवाद
फिर उसने अग्नि के समान तेजस्वी और सुन्दर पंखों वाले तीन तीखे बाणों से सात्यकि को घायल कर दिया, जो उसके कानों तक खींचे गए थे। वे बाण सात्यकि के कवच को छेदकर उसके शरीर में घुस गए॥11॥
Then he pierced Satyaki with three sharp arrows, which were as radiant as fire and had beautiful feathers, which he had drawn out till his ears. Those arrows pierced Satyaki's armour and entered his body.॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥