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श्लोक  7.117.7 
तामस्य लघुतां द्रोण: समवेक्ष्य विशाम्पते।
प्रहस्य सहसाविध्यत् त्रिंशता शिनिपुङ्गवम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
प्रजानाथ! सात्यकि की फुर्ती देखकर द्रोणाचार्य हँस पड़े। उन्होंने एकाएक तीस बाण चलाकर महारथी सात्यकि को घायल कर दिया।
 
Prajanath! Seeing Satyaki's agility, Dronacharya laughed. He suddenly shot thirty arrows and injured Satyaki, the great warrior.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)